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एबी स्‍वयं सहायता समूह
 
 स्‍वयं सहायता समूह  (स्‍व स स)

सामाजिक और व्‍यापक बैंकिंग के जरिए औपचारिक ऋण प्रणाली का विस्‍तरण होने के बावजूद, कई प्रांतों में ग्रामीण गरीब अब भी अपनी आकस्मिक आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए साहूकारों पर निर्भर कर रहे हैं. ऐसी परिस्थितियों में स्‍वयं सहायता समूह की धारणा, गरीबों को ऋण सहायता प्रदान करने वाले गैर संस्‍थागत एजेंसी के रूप में उभर आया है. यह औपचारिक ऋण प्रणाली संस्‍थाओं का उदीयमान साझेदार है.स्‍वयं सहायता समूह माईक्रो ऋण प्रणाली का अंतर्भाग है
 
 स्‍वयं सहायक समूह के उद्देश्‍य निम्‍न प्रकार हैं :

  • गरीबों में बचत एवं बैंकिंग आदतों का सृजन करना;
  • आर्थिक, तकनीकी और नैतिक क्षमता प्रदान करने;
  • उत्‍पादन कार्यों के प्रयोजन हेतु उन्‍हें ऋण प्रदान करने, और यथोचित समय में उसे चुकाने, और इस प्रक्रिया में उन्‍हें आर्थिक रूप से समृद्ध बनाना;
 
स्‍वयं सहायता - बैंक लिंकेज कार्यक्रम - आरंभ: :

  • बंगलादेश ग्रामीण बैंक के अनुभव ने सूत्रपात किया.
  • औपचारिक ऋण प्रणाली के कड़े नियम और गरीबों की निस्‍सहायता ने उन गरीब समुदायों को  "अपनी सहायता और आपसी सहायता" की धारणा अपनाते हुए समूह बनने के लिए बाध्‍य किया".
  • वर्ष 1992 में नाबार्ड ने स्‍व स समूह को बैंकों के साथ लिंक करने के लिए प्रायोगिक परियोजना बनायी.
 
  स्‍वयं सहायता समूहों के चयन हेतु मानक :

  1. समूह को कम से कम 6 महीनों से सक्रिय रहना चाहिए.
  2. ग्रूप अपनी निजी स्रोतों से बचत और साख लेनदेनों का परिचालन सफलता पूर्वक किया हो.
  3. ग्रूप लोकतांत्रिक रूप से कार्यकरना है. यह निरूपित होना है कार्यकलापों में प्रत्‍येक सदस्‍य की बात चलती है.
  4. ग्रूप को बही खाते/रिकार्डों का सही निर्वाह करना है.
  5. स्‍व स समूह के सदस्‍य प्राय: एकसमान की पृष्‍ठभूमि और अभिरुचि के होने चाहिए.
 
 ऋण आवश्‍यकताओं का आकलन :


प्रथम वितरण :
उनके जमा संग्रह ऋण अनुपात 1:4  गुना या Rs 50,000  जो भी अधिक हो.

द्वितीय वितरण :उनके जमा संग्रह ऋण अनुपात1:10  गुना या ग्रामीण क्षेत्रों में Rs1,00,000 या शहरी क्षेत्रों में Rs Rs 1,50,000 जो भी अधिक हो.

तीसरे और बाद के वितरण :  माइक्रो ऋण योजना के अनुसार वित्‍त पोषण

एसएचजी को नकदी ऋण सुविधा : प्रलेखन के संबंध में एसएचजी की कठिनाई को दूर करने हेतु, समूह के अनुमानित बचत के आधार पर 5 वर्ष की अवधि हेतु नकदी ऋण सीमा मंजूर की जाएगी।

वितरण: 5 वर्ष हेतु अनुमानित बचत हेतु 1:4 अनुपात में नकदी ऋण सीमा का आकलन कर वार्षिक आधार पर आहरण सीमा निर्धारित की जाएगी (या)

 
 चुकौती अवधि:

30 से 60 महीनों की अवधि में मासिक किस्‍तों में ऋणों को चुकाना है.
 
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