Andhra Bank
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जमा नीति
 
 ARROW परिचय
 

बैंक का एक महत्वपूर्ण कार्य, ऋण देने के प्रयोजन हेतु जनता से जमा स्वीकार करना है. वास्तव में जमाकर्ता बैंकिंग प्रणाली के प्रमुख पणधारी हैं. भारत में, जमाकर्ता और उनके हित, बैंकिंग विनियामक ढांचे के मूल क्षेत्र  होते हैं और इसकी प्रतिष्ठापना बैंकिंग विनियम अधियिम,1949 में की गई है. भारतीय रिजर्व बैंक को  समय- समय पर  जमाओं पर ब्याज दर और जमा खातों के संचालन से संबंधित अन्य पहलुओं के संबंध में निदेश जारी करने / सलाह देने का अधिकार दिया गया है.वित्तीय प्रणाली में उदारीकरण और  ब्याज दरों के अविनियमन के साथ  बैंक अब भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी व्यापक र्मादर्शी सिद्धांतों के अंदर अपने जमा उत्पादों कानिर्धारण करने के लिए स्वतंत्र हैं.

जमाओं के संबंध में यह नीति प्रलेख, बैंकों द्वारा प्रस्तावति विभिन्न जमा उत्पादों के निर्माण के संबंध में  मार्गदर्शी सिद्धांत की रूपरेखा  और खाते के संचालन शर्तों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है.  यह प्रलेख जमाकर्ताओं के अधिकारों को मान्यता देता है और इसका उद्देश्य जनता से जमाओं के स्वीकार करना, विभिन्न जमा खातों के संचालन और उनमें लेनदेन, विभन्न जमा खातों पर ब्याज का भुगतान, जमा खातों को बंद करना, मृत जमाकर्ताओं के जमाओं के निपटान की पद्धति आदि और ग्राहकों के लाभ से संबंंिधत के विभिन्न पहलुओं की सूचना का प्रचार करना है. अपेक्षा है कि यह प्रलेख अलग-अलग ग्राहकों के साथ व्यापार-व्यवहार करने में बेहतर पारदर्शिता प्रदान करेगा और ग्राहकों में अपने अधिकार के प्रति जागरुकता का सृजन करेगा. अंतिम उद्देश्य यह है कि ग्राहक बिना माँगे उचित एवं अधिकृत सेवा प्राप्त करेंगे.

इस नीति को अपनाते समय बैंक, भारतीय बैंक संघ के  बैंकरों की उचित व्यवहार संहिता में बताए अनुसार, अलग-अलग ग्राहकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है. यह प्रलेख एक व्यापक  ढांचा है जिसके तहत साधारण जमाकर्ताओं के अधिकारों को मान्यता दी गई है. विभिन्न जमा योजनाओं में लेन-देन से संबंधित अनुदेश और संबद्ध सेवाओंधके विवरण समय-समय पर जारी किये जायेंगे.

 
 ARROWजमा खातों के प्रकार
 

बैंक द्वारा प्रस्तुत उत्पादों को विवभिन्न नाम दिये गये हैं. जमा उत्पादों को मोटे तौर पर निम्नांकित प्रकारों में श्रेणीकृत किया गया है. प्रमुख जमा योजनाओं की परिभाषा निम्न प्रकार हैं :-

  • '' माँग जमा '' बैंक द्वारा प्राप्त ऐसी जमा से है जो माँग करने आहरण-योग्य है.

  • '' बचत जमा '' माँग जमा का एक रूप है जो किसी विशेष अवधि के दौरान बैंक द्वारा अनुमत आहरण संख्या और आहरण की राशि पर प्रतिबंध की शर्त पर है.

  • '' मियादी जमा '' नियत अवधि के लिए बैंक द्वारा प्राप्त जमा है, नियत अवधि की समाप्ति के बाद आहरण-योग्य है और इसमें आवर्ति, मियादी जमा/ पुनर्निवेश जमा/ नकदी प्रमाण पत्र आदि शामिल है.

  • सूचना पर देय जमाराशि विशेष अवधि की मियादी जमा है जो कम से कम एक पूरा बैंकिंग कार्य दिवस की सूचना देने पर आहरण-योग्य है.

  • '' चालू जमा '' माँग जमा का एक रूप है जिसमें खाते में जमा शेष के आधार पर या सहमत किसी राशि तक अनगिनत बार आहरण की अनुमति है और इसमें अन्य जमा खाते भी शामिल हैं जो न तो बचत जमा है और ना ही मियादी जमा.

  • अनिवासी भारतीयों से जमा :

  • रुपया जमा : अनिवासी भारतीयों और भारतीय मूल के व्यक्तियों से स्वीकृत रुपया जमा एन आर ओ और एन आर ई खाते के रूप में रखी जाती है.

    1. अनिवासी साधारण खाता : अनिवासी भारतीय अपने स्थानीय प्रामाणिक लेनदेन की वसूली के लिए अनिवासी साधारण ( एन आर ओ) जमा खाता खोल सकते है. जब भारतीय अनिवासी हो जाते है, उनका विद्यमान रुपये खाते को एन आर ओ खाते के रूप में नामित किया जाता है. भारत में विदेशी राष्ट्रिक की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी एन आर ओ खाते खोले जा सकते हैं. ये खाते चालू, बचत, आवर्ती और मियादी जमाओं के रूप में रखे जा सकते हैं. इन जमाओं पर ब्याज की दरें, देशी जमाओं के समतुल्य है. तथापि अर्जित ब्याज पर आयकर अधिनियम के अनुसार कर का भुगतान किया जाना है. एन आर ओ जमा का मूलधन गैर-प्रत्यावर्तनीय है, वर्तमान आय और ब्याज प्रत्यावर्तनीय है. इसके अलावा अनिवासी भारतीय / भारतीय मूल के नागरिक (एन आर आई /पी आई ओ) समय-समय पर भरतीय रिजर्व बैंक द्वारा की गई घोषणा और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिये गये मार्गदर्शी सिद्धांतों के अनुसार राशि को प्रेषित कर सकते हैं. ऐसे प्रत्यावर्तनों में विनिमय जोखिम का वहन जमाकर्ताओं द्वारा किया जाना है.

    2. अनिवासी (बाह्य ) रुपया खाता एन आर (ई) आर ए : ये खाते विदेश से बैंकिंग चैनल के माध्यम से भारत में प्रेषित निधि से खोले जाते हैं. इन खातों को चालू, बचत और मियादी जमा के रूप में रखा जा सकता है. यदि यह मियादी जमा है तो भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशों के अनुसार न्यूनतम एक वर्ष की अवधि के लिए स्वीकार किया जाता है. स्थनीय भुगतान निर्बाध रूप से किया जा सकता है. यह प्रत्यावर्तनीय खाता है और दूसरे एन आर ई या एफ सी एन आर (बी) खातों से निधि के अंतरण की अनुमति है. चूँकि इन खातों को रुपये में रखा जाता है, जमाकर्ता को विदेशी मुद्रा में परिवर्तन के लिए विनियम जोखिम का वहन करना पड़ता है.

    3. विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफ सी एन आर (बी) ) खाता : ये जमाएं भारतीय राष्ट्रिक या भारतीय मूल के अनिवासी व्यक्तियों से स्वीकार किये जाते हैं और यू.एस. डॉलर, पाउंड स्टर्लिंग, यूरो, केनेडियन डॉलर और आस्ट्रलियन डॉलर में बनाया रखा जाता है. इस श्रेणी के अंतर्गत केवल मियादी जमा ही स्वीकार किये जाते हैं. जमाकर्ता विनिमय जोखिम से संरक्षित होते हैं और विदेशी विनिमय जोखिम का वहन बैंक द्वारा किया जाता है. न्यूनतम परिपक्वता अवधि 1 वर्ष और अधिकतम परिपक्वता अवधि पाँच वर्ष है.

    4. एन आर ई और एफ सी एन आर मियादी जमाओं पर देय ब्याज दरें भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशों के अनुसार हैं.

 

खाते खोलना और जमा खातों में लेनदेन
 ARROWकेवाई सी मानदंड
 
  1. बैंक, किसी भी प्रकार के जमा खाता को खोलने के पूर्व भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी '' अपने ग्राहक को जानिए '' दिशा-निर्देश या अन्य ऐसे मानदंड या प्रक्रिया जो बैंक द्वारा अपनाये गये हों के अंतर्गत यथा अपेक्षित पर्याप्त सतर्कता बरतेगी. व्यक्तियों से एकल नाम में या दो या दो से अधिक व्यक्तियों के संयुक्त नाम में जमा स्वीकार किये जाते हैं, जो "अपनेग्राहककोजानिए " सिद्धांतों के अनुरूप  उपयुक्त पहचान की शर्त पर है. यदि भावी जमाकर्ता के खाते खोलने के संबंध में निर्णय लेने के लिए  उच्चतर स्तर की मंजूरी की आवश्यकता हो, तो खाता खोलने में विलम्ब के कारणो की जानकारी भावी ग्राहक को दी जाएगी और बैंक के अंतिम निर्णय की सूचना उन्हें यथाशीघ्र दी जाएगी.

  2. आवेदक को बैंक परिवेश में लाने अर्थात खाता खोलने के लिए बैंक खाता खोलने का फॉर्म और अन्य कागजात संभावी जमाकर्ता को देगा. आवेदन पत्र में प्रस्तुत की जाने वाली सूचना तथा सत्यापन और रिकार्ड में रखने हेतु प्रस्तुत किये जाने वाले प्रलेख का ब्यौरा होंगा.

    प्रलेखन अपेक्षाएं और अन्य सूचना का संग्रह, जमाकर्ताओं के संघटन, जोखिम बोध, बैंकिंग व्यवहार, विवधिक अपेक्षाओं और समय- समय पर भारतीय रिजवर्व बैंक द्वारा जारी मार्गदर्शी सिद्धांतों पर आधारित है.

  3. जमा खाता खोलते समय उपयुक्त सचेतना प्रक्रिया में ग्राहक द्वारा दी गई अपनी पहचा%E
 
 
 
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